शुक्रवार, ७ जून, २०१९

डर
बदली हुयी हवाओं का रुख देख कर
जर्रा जर्रा काँप उठता है
हवाएँ भी वही है ,फिजाये भी वही है 
क्यू मुस्कुराना भूल गयी कलियाँ
जर्रा जर्रा काँप उठता है
बदली हुयी हवाओं का रुख देख कर
क्यू सोंचता है मन, मन का मन से मिलना
सबका मन सरीका तो ही लगता है
जर्रा जर्रा काँप उठता है
बदली हुयी हवाओं का रुख देख कर
क्यू रुख मोड़ रही है राहे
किसी अपनेसे मिलनेसे पहले
जर्रा जर्रा काँप उठता है
बदली हुयी हवाओं का रुख देख कर
क्यू अपनासा नहीं लगता कोई दुनिया में आजकल
इस बदले हुए ज़माने का रुख देखकर
जर्रा जर्रा काँप उठता है
बदली हुयी हवाओं का रुख देख कर
वर्षा थोटे /पतके

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